UPI पेमेंट पर MDR चार्ज लगेगा? जानिए सरकार का नया प्रस्ताव और आप पर क्या होगा असर

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अपडेटेड: 4 अगस्त 2026
पिछले करीब छह साल से भारत में UPI (यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस) पेमेंट पूरी तरह फ्री चल रहा है। चाहे सब्जी वाले से ₹50 की भुगतान हो या दोस्त को ₹10,000 ट्रांसफर करना हो — किसी भी तरह का अतिरिक्त चार्ज नहीं लगता। लेकिन अब यह मुफ्त सफर खत्म हो सकता है। सरकार UPI पर Merchant Discount Rate (MDR) वापस लाने की तैयारी कर रही है। हालांकि, यह चार्ज सिर्फ बड़े व्यापारियों पर लागू होगा, छोटे दुकानदार और आम उपभोक्ता अभी भी फ्री में UPI का इस्तेमाल कर सकेंगे।
आइए विस्तार से समझते हैं कि यह MDR क्या है, सरकार का नया प्रस्ताव क्या है, और इसका आपकी जेब पर क्या असर पड़ेगा।

MDR क्या होता है? सरल भाषा में समझें

Merchant Discount Rate (MDR) एक वह फीस होती है जो व्यापारी (मर्चेंट) डिजिटल पेमेंट प्रोसेसिंग के बदले में बैंकों और पेमेंट सर्विस प्रोवाइडर्स को देता है। यह ट्रांजैक्शन वैल्यू का एक छोटा प्रतिशत होता है, जो बैंकों, पेमेंट नेटवर्क और पेमेंट कंपनियों के बीच बांटा जाता है।
उदाहरण के लिए, अगर कोई व्यापारी ₹10,000 का सामान बेचता है और MDR 0.05% (5 बेसिस पॉइंट) है, तो उसे केवल ₹5 की फीस देनी होगी। यह राशि सीधे ट्रांजैक्शन के समय कट जाती है और ग्राहक को कुछ भी अतिरिक्त नहीं देना पड़ता।

अब तक UPI क्यों फ्री था?

जनवरी 2020 में, भारत सरकार ने UPI और RuPay डेबिट कार्ड ट्रांजैक्शन पर MDR हटा दिया था। इसका मकसद था कि देश में डिजिटल पेमेंट को बढ़ावा दिया जाए और छोटे-बड़े सभी व्यापारी कैशलेस लेन-देन को अपनाएं। इस फैसले ने UPI को आम आदमी की पहुंच में ला दिया।
NPCI के आंकड़ों के अनुसार, वित्त वर्ष 2017 में जहां सालाना UPI ट्रांजैक्शन करीब 20 मिलियन थे, वहीं वित्त वर्ष 2026 में यह बढ़कर लगभग 242 बिलियन हो गए। ट्रांजैक्शन वैल्यू भी ₹0.07 लाख करोड़ से बढ़कर ₹314 लाख करोड़ के पार पहुंच गई।

सरकार का नया प्रस्ताव — अब क्या बदलने वाला है?

अगस्त 2026 की ताजा खबरों के अनुसार, वित्त मंत्रालय UPI पर जीरो-MDR प्रावधान को खत्म करने की दिशा में कदम बढ़ा रहा है। हालांकि, यह चार्ज सभी पर नहीं लगेगा। प्रस्तावित नियमों के मुताबिक:

Table

प्रस्तावित नियम विवरण
किन पर लागू होगा बड़े व्यापारी जिनकी सालाना टर्नओवर ₹1 करोड़ से ₹1.5 करोड़ या उससे ज्यादा हो
किन ट्रांजैक्शन पर केवल ₹2,000 से ऊपर के UPI ट्रांजैक्शन
प्रस्तावित MDR दर 5 से 7 बेसिस पॉइंट (0.05% से 0.07%)
किन पर नहीं लगेगा छोटे व्यापारी, P2P (व्यक्ति से व्यक्ति) ट्रांजैक्शन, ₹2,000 से कम के पेमेंट
इसका मतलब साफ है — अगर आप एक छोटी किराना दुकान चलाते हैं या सिर्फ दोस्तों-रिश्तेदारों को पैसे भेजते हैं, तो आप पर कोई असर नहीं पड़ेगा। लेकिन बड़े मॉल, सुपरमार्केट, ई-कॉमर्स कंपनियों और बड़े रिटेलर्स को अब थोड़ी फीस देनी होगी।

यह प्रस्ताव क्यों आ रहा है?

1. बैंकों और फिनटेक कंपनियों का दबाव

UPI ट्रांजैक्शन की संख्या तेजी से बढ़ी है, लेकिन बैंक और पेमेंट कंपनियां इससे कोई सीधी कमाई नहीं कर पा रही हैं। Payments Council of India समेत कई संगठनों ने सरकार से MDR वापस लाने की मांग की थी। इंडस्ट्री का तर्क है कि बिना रेवेन्यू मॉडल के UPI इकोसिस्टम को लंबे समय तक चलाना मुश्किल है।

2. सरकारी सब्सिडी कम हो रही है

MDR न होने की वजह से सरकार बैंकों को वित्तीय सहायता दे रही थी। वित्त वर्ष 2024 में यह सब्सिडी ₹3,631 करोड़ थी, जो घटकर 2025 में ₹1,441 करोड़ और 2026 में मात्र ₹437 करोड़ रह गई। इंडस्ट्री के मुताबिक, असली जरूरत ₹4,000-5,000 करोड़ सालाना है।

3. संसदीय समिति की सिफारिश

मार्च 2026 में वित्त पर संसदीय स्थायी समिति ने भी अपनी रिपोर्ट में कहा था कि UPI इकोसिस्टम को वित्तीय रूप से सस्टेनेबल बनाने के लिए एक व्यवहार्य रेवेन्यू मैकेनिज्म जरूरी है, ताकि सरकारी खजाने पर लगातार बोझ न पड़े।

आम उपभोक्ता पर क्या असर पड़ेगा?

अगर आप एक आम UPI यूजर हैं, तो आपके लिए कोई बदलाव नहीं होगा। यह चार्ज सीधे तौर पर ग्राहक से नहीं वसूला जाएगा, बल्कि व्यापारी द्वारा बैंकों को दिया जाएगा। हालांकि, कुछ बड़े मर्चेंट्स इस लागत को ग्राहकों पर ट्रांसफर कर सकते हैं, लेकिन 0.05% से 0.07% की दर इतनी कम है कि इसका कोई महसूस योग्य असर नहीं पड़ेगा।
उदाहरण के लिए, अगर आप ₹10,000 का सामान खरीदते हैं, तो मर्चेंट को केवल ₹5 से ₹7 की फीस देनी होगी। यह राशि कार्ड पेमेंट पर लगने वाले 1.5% MDR के मुकाबले कुछ भी नहीं है।

क्या छोटे व्यापारियों को भी चार्ज देना होगा?

नहीं। प्रस्तावित नियमों में साफ तौर पर छोटे व्यापारियों को छूट दी गई है। लगभग 90% UPI-एक्सेप्टिंग मर्चेंट्स छोटे और माइक्रो बिजनेस हैं, और उन पर यह चार्ज नहीं लगेगा। सरकार की डिजिटल पेमेंट को बढ़ावा देने की नीति इससे प्रभावित नहीं होगी।

निष्कर्ष

UPI पर MDR का प्रस्ताव भारत के डिजिटल पेमेंट इतिहास में एक महत्वपूर्ण मोड़ साबित हो सकता है। छह साल बाद एक बार फिर बड़े व्यापारियों से एक नाममात्र फीस ली जाएगी, ताकि बैंक और पेमेंट कंपनियां इस इंफ्रास्ट्रक्चर को बेहतर तरीके से मेंटेन कर सकें। आम उपभोक्ता और छोटे दुकानदारों के लिए UPI आज भी और आगे भी पूरी तरह फ्री रहेगा।
अगर आप एक बड़े व्यापारी हैं, तो अपनी पेमेंट स्ट्रैटेजी में इस छोटे से बदलाव को शामिल कर लें। और अगर आप एक आम यूजर हैं, तो बेफिक्र रहें — आपका QR कोड स्कैन करना और पेमेंट करना उतना ही आसान और फ्री रहेगा, जितना आज है।

डिस्क्लेमर: यह आर्टिकल अगस्त 2026 में उपलब्ध सार्वजनिक जानकारी और मीडिया रिपोर्ट्स के आधार पर तैयार किया गया है। सरकार की ओर से अभी तक कोई औपचारिक अधिसूचना जारी नहीं की गई है। अंतिम निर्णय आने तक स्थिति में बदलाव संभव है। कृपया कोई भी फाइनेंशियल निर्णय लेने से पहले अपने वित्तीय सलाहकार से परामर्श करें।
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Vipin Jaiswar main ek Tech enthusiast aur finance blogger hoon, jo filhal Mahatma Gandhi Kashi Vidyapeeth (MGKVP) se BCA kiye hai, aur MCA ki taiyari hai. Loan Loading ke zariye mera maksad logon ko digital loans aur financial services ki sahi aur surakshit jankari dena hai. Main jatil (complex) finance topics ko saral bhasha mein samjhane ka prayas karta hoon.